Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 36, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 36, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 36 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
अयं संविद्वपुरहं न काचिन्न कृतास्पदः ।
देहः पततु वोदेतु यथाभिमतयेच्छया ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
तो क्या आप प्राण आदिशक्ति हैं अथवा देह में स्थित अहंकार आदि हैं, ऐसी आशंका होने पर
नहीं, ऐसा कहते है ।
यह न मेँ चित् देह ही हूँ, न तो मैं कोई प्राण आदि शक्ति हूँ ओर न देह में स्थित अहंकार आदि ही हूँ।
प्रश्न: तब आपको देह से क्या मतलब है ?
उत्तर : कुछ भी नहीं । देह अपनी इच्छानुसार चाहे गिरे चाहे उदित हो, उससे मेरा कुछ भी
प्रयोजन नहीं है