Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 39, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 39, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 39 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
ब्रह्मरन्ध्रकृतोत्थाना प्राणशक्तिरथासुरम् ।
शनैराक्रमयामास गङ्गा सर्वमिवार्णवम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर जैसे गंगाजी धीरे-धीरे सारे सागर को भर देती है वैसे ही ब्रह्मरन्ध्र में उदित हुई प्राणशक्ति
ने प्रह्लाद को पूर्ण कर दिया