Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 4, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 4, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
तदतीतमदीनात्मन्सर्वमन्तःकृतं मया ।
रम्यं पुण्यं पवित्रं च रत्नवृन्दमिवान्वितम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे उदारचरित, मनोहर, पुण्यमय और क्रमयुक्त वह सारा का सारा अतीत उपदेश सिलसिलेवार
गुँथे हुए मनोहर और पवित्र रत्नों के समान मैंने अपने हृदय में स्थापित किया