Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 40, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 40, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 40 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
सर्वभूतानि तिष्ठन्तु सर्वमेव प्रयातु वा ।
नश्यन्तु वाथ वर्धन्तामात्मन्येवाभितिष्ठति ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
सब भूत चाहे रहे चाहे सब
कुछ चला जाय अथवा सबका नाश हो जाय या सब वृद्धि को प्राप्त हों, किन्तु तत्त्वज्ञानी आत्मनिष्ठ ही
रहता है उससे विचलित नहीं होता