Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 42, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
द्विविधा मुक्तता लोके संभवत्यनघाकृते ।
सदेहैका विदेहान्या विभागोऽयं तयोः शृणु ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रारब्ध शेष से उद्बोधित शुद्धवासना सहित भगवद् इच्छा ही समाधिमुक्त के प्रबोध में हेतु है
यों विदेहमुक्त से समाधिमुक्त का अन्तर कहने के लिए संदेह ओरे विदेह मुक्तियों का विभाग
दिखलाते हैं ।
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे निष्पाप आकृतिवाले श्रीरामचन्द्रजी, लोक में दो प्रकार की मुक्ति होती
है, एक सदेह मुक्ति और दूसरी विदेह मुक्ति उसका यह विभाग है, उसे आप सुनिये