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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 42, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 42, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 42 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

असंसक्तमतेर्यस्य त्यागादानेषु कर्मणाम् । नैषणा तत्स्थितिं विद्धि त्वं जीवन्मुक्ततामिह ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस अनासक्त मतिवाले पुरुष का इष्ट ओर अनिष्ट कर्मो के त्याग और ग्रहण में राग नहीं है, उसकी स्थिति को आप जीवन्मुक्ति जानिये