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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 67

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 67 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 67

संस्कृत श्लोक

तथैव कीरनगरं दृष्टवानसि तत्तथा । तदैव चान्यदा वापि मायार्थं हि भवान्द्विज ॥ ६७ ॥

हिन्दी अर्थ

हे द्विज, उसी प्रकार वहीं पर कीरनगर भी भ्रमात्मक देखा है और दूसरे दिन अघमर्षण के समय भी सब मायापूर्ण वस्तुएँ (या कार्य) देखी हैं