Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 49, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 49, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 49 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
लौकिको यस्त्वयं कालो वर्षकल्पयुगात्मकः ।
संकल्प्यते पदार्थौघैः पदार्थौघश्च तेन तु ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रथम काल की संकल्परूपता सिद्ध करते हैं।
वर्ष, कल्प, युगरूप जो यह लौकिक काल है, वह जन्यमात्र के कालरूप उपाधिजन्य होने के कारण
सूर्य क्रिया, चन्द्र पिण्ड आदि पदार्थ समूहों द्वारा संकल्पित होता है और उस काल द्वारा प्रतिबन्ध ओर
अभ्यनुज्ञावश सब पदार्थों के समूह उनकी क्रिया फल आदि की व्यवस्था संकल्पित होती है