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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

चित्तं नाभिमवष्टभ्य तस्माद्यत्नेन राघव । संसारचक्रं वहनादात्मनः परिरोधय ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

हे रामचन्द्रजी, इसलिए प्रयत्न से चित्तरूपी नाभि को रोककर संसाररूपी चक्र को आत्मा को जन्मपरम्परा की प्राप्ति कराने से रोकिये