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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

तस्मिन्द्रुतमवष्टब्धे धिया पुरुषयत्नतः । गृहीतनाभिवहनान्मायाचक्रं निरुध्यते ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

पुरुष प्रयत्न से बुद्धि द्वारा उस चित्तरूपी महानाभि के (पहिये के बीच के हिस्से के) रूकने पर मायाचक्र, जिसकी नाभि पकड़ ली गई है, भ्रमण से रुक जाता है