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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 50, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 50, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

अवष्टब्धमनोनाभिमोहचक्रं न गच्छति । यथा रज्ज्वां निरुद्धायां कीलकं रज्जुवेष्टितम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे रस्सी के रोकने पर रस्सी में लपेटा हुआ कसि आदि का बनाया हुआ क्रीड़ाचक्र (लट्टू ) नहीं चलता है वैसे ही मोहचक्र, जिसकी मनरूपी नाभि रोक दी गई है, नहीं चलता