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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 51, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । केन क्रमेण भगवन्मुनिनोद्दालकेन तत् । भूतपञ्चकमालूनं कृत्वान्तः प्रविचारितम् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे भगवान्‌, उद्दालक मुनि ने किस क्रम-से-उन पंचमहाभूतों को छिन्न- भिन्न कर अपने अन्तःकरण में विचार किया ?