Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 51, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 51, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 51 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
श्रृणु राम यथापूर्वं भूतवृन्दविचारणात् ।
उद्दालकेन संप्राप्ता परमा दृष्टिरक्षता ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, जिस
प्रकार प्राचीन काल में उद्दालक मुनि ने पंचमहाभूतों के विचार से अकुण्ठित परम दृष्टि प्राप्त की। उस
प्रकार को आप सुनिये