Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 52, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 52, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 52 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
यस्मात्किंचिदवाप्नोषि यस्मिन्वहसि निर्वृतिम् ।
तस्मिंश्चेतः शमे मूर्ख नानुबध्नासि किं पदम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे चित्त, जिससे मन और वाणी का अगोचर विदेह केवल्य सुख तुम्हें मिले,
जिसमें तुम्हें जीवन्मुक्ति विश्रान्ति सुख मिले, उस सकलवृत्ति के शमरूप समाधि में उद्योग क्यों
नहीं करते हो ?