Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 53, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
मरणं जीवितोपान्तं जीवितं मरणान्तगम् ।
भावोऽभावाद्व्यवच्छिन्नः कष्टेयं दुःखवेदना ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
मरणादि पारलौकिक दुःख पुनर्जन्म तक रहता है एवं जीवन आदि
ऐहिक दुःख मरण पर्यन्त रहता है और भोग्यवर्ग नाश से खण्डित होता है, यह दुःख वेदना बड़ी
कष्टकारिणी है