Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 53, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
इदं लब्धमिदं प्राप्स्यामीत्यार्तिर्दाहकारिणी ।
न शाम्यत्यर्करत्नानां ग्रीष्मेऽग्निरिव दुर्धियाम् ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे ग्रीष्म ऋतु में सूर्यकान्त मणियों की अग्नि शान्त नहीं होती है वैसे ही
दुर्बुद्धियों की 'यह मुझे मिल गया, इसको मैं प्राप्त करूँगा" इस प्रकार की सन्तापप्रद पीड़ा कभी शान्त
नहीं होती