Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 53, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 53, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 53 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
नास्तीदमिदमस्तीति चिन्ता धावत्यहंकृतिम् ।
जडाशया जडामभ्रमाला शैलावलीमिव ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे जल की आश्रयभूत (जल से भरी हुई) मेघमाला गुरुतर पर्वत पंक्ति की ओर
दौड़ती है वैसे ही "यह है यह नहीं है” इस प्रकार की चिन्ता, जिसका आश्रय अज्ञ पुरुष है, जड़ अहंकार
की ओर अग्रसर होती है