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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 54, Verse 77

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 54, verse 77 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 54 · श्लोक 77

संस्कृत श्लोक

अस्मदादीन्मुनीन्दर्भपवित्राङ्ककराम्बुजान् । विद्याधरीभिर्वलितान्विद्याधरपतीनपि ॥ ७७ ॥

हिन्दी अर्थ

करकमल मेँ कुशा की पवित्री के चिहवाले हमारे जैसे मुनियों को और विद्याधरियों सहित विद्याधरो के अधिपतियों को भी देखा