Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 55, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 55, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
आत्मज्ञानदिनैकार्क मत्संशयतृणानल ।
अज्ञानदाहशीतांशो सत्तासामान्यमीश किम् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
सत्तासामान्य का लक्षण बताने की कृपा कीजिए