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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 55, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 55, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 55 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

अस्मत्प्रभृतयः सर्वे नारदाद्याश्च राघव । ब्रह्मविष्ण्वीश्वराद्याश्च दृष्टावस्यां व्यवस्थिताः ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

उसीका उदाहरण देते हैं। हे श्रीरामचन्द्रजी, आस्मत्प्रभृति अर्थात्‌ हमारे सदृश्य मनुष्य लोक में इस दृष्टि में स्थित है, आकाशरूपी वीथी में नारदादि मुनिगण इस दृष्टि में स्थित हैं और उससे भी ऊर्ध्वलोक में ब्रह्मा, विष्णु, महादेह आदि इस दृष्टि में स्थित हैं