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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verses 10–12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 56, verses 10–12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 10-12

संस्कृत श्लोक

समाधिस्थानकस्थस्य चेतश्चेद्वृत्तिचञ्चलम् । तत्तस्य तत्समाधानं सममुन्मत्तताण्डवैः ॥ १० ॥ उन्मत्तताण्डवस्थस्य चेतश्चेत्क्षीणवासनम् । तदस्योन्मत्तवृत्तं तत्समं बुद्धसमाधिना ॥ ११ ॥ व्यवहारी प्रबुद्धो यः प्रबुद्धो यो वने स्थितः । द्वावेतौ सुसमौ नूनमसंदेहं पदं गतौ ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

दोनों ही सब सन्देहो का उच्छेद करनेवाले परमपद में प्रतिष्ठित हैं