Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 56, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 56, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 56 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
वैराग्याभ्यासशास्त्रार्थप्रज्ञागुरुमयक्रमैः ।
पदमासाद्यते पुण्यं प्रज्ञयैवैकयाथवा ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
वैराग्य के अभ्यास, शास्त्रर्थविचार, प्रज्ञा, गुरु-उपदेश और यमनियमों के क्रम से पुण्य पद प्राप्त होता
है अथवा केवल प्रज्ञा से ही पुण्य पद प्राप्त होता है