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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 57, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 57, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 57 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

स्वतो यदात्मतो यस्य चिद्द्रवत्वादिवर्तनम् । तदावर्ताद्यहंतादिभेदाद्याकारिता इव ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

आत्मरूपी जल का चित्‌ होने से जो स्वतः द्रवत्व आदि में वर्तन है वह आवर्तं आदि, अहन्ता त्वन्ता, आदि घट, दीवार भेद आदि तत्‌-तत्‌ आत्मसत्ता के समान स्थित है