Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 58, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
रुद्राक्षवृक्षदोलाभिः साप्सरोभिर्विभाति यः ।
लोलरत्नशलाकाभिर्लहरीभिरिवार्णवः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
दिव्यांगनाएँ जिस पर आरूढ है, ऐसे अतिचंचल रत्नों की
शलाकाओं से युक्त रुद्राक्ष वृक्षों में लटक रहे झूलों से वह ऐसे शोभता है, जैसे समुद्र चंचल रत्न रूपी
शलाकाओं से युक्त लहरियों से शोभता हो