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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 58, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 58, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 58 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

गणाङ्गनानामनिशं मत्तानां चरणैर्हताः । अशोका इव राजन्ते यत्राशोका विलासिनः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

जहाँ प्रमत्त प्रमथगणों की अंगनाओं के चरणों से विताडित विलासी शोकरहित पुरष ऐसे भले लगते हैं, जैसे अशोक वृक्ष