Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 59, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
तदत्र तावन्मांसास्थि नाहमेतदचेतनम् ।
न चैतन्मम संश्लेषमेत्यब्जस्य यथा जलम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
इस शरीर में विद्यमान मांस ओर अस्थि मेँ नहीं हूँ, क्योकि
वे अचेतन है, मेरे सम्बन्ध को भी वे (माँस ओर अस्थि) प्राप्त नहीं कर सकते, क्योकि जल में कमल की
भाँति मैं असंग हूँ