Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 59, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
मांसं जडं न तदहं नैवाहं रक्तमप्यलम् ।
जडान्यस्थीनि नैवाहं न चैतानि मम क्वचित् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
मांस जड़ है, अतः मांस मैं नहीं ह, (रक्त जड़ है, अतः) वह भी मद्रूप होने में
समर्थ नहीं है। हड्डियाँ भी जड़ हैं, अतः हड्डियाँ भी मैं नहीं हूँ और न किसी हालत में वे मांस आदि मेरे
हैं