Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 59, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 59, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
कर्मेन्द्रियाणि नैवाहं न च कर्मेन्द्रियाणि मे ।
जडं यत्किल देहेऽस्मिंस्तदहं नैव चेतनः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
देह में जो कुछ जड पदार्थ है वह मैं नहीं हूँ, क्योकि मैं चेतन हूँ