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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 63, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 63, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 63 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

देशकालवशादेव तुच्छस्यातुच्छतामिह । अतुच्छस्य तु तुच्छत्वं वर्ज्ये निन्दास्तुती बुधैः ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

संसार में देश और काल के प्रभाव से तुच्छ में अतुच्छत्व और अतुच्छ में तुच्छत्व भावना हो जाती है, इसलिए पण्डितो को तुच्छ और अतुच्छ बुद्धि से किसी की निन्दा या स्तुति नहीं करनी चाहिए