Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 63, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 63, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 63 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
त्रैलोक्ये च स्त्रियः शैलाः समुद्रवनराजयः ।
भूतानि वस्तुशून्यानि सारो नास्त्यत्र वस्तुतः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
इस त्रिलोकी में स्तर्यो, पर्वत, समुद्र, वनपंक्तियाँ
आदि भूत सत्यता से रहित हैं, वास्तव में यहाँ कुछ भी सारभूत वस्तु नहीं है