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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 63, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 63, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 63 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

भावाभावपरिच्छेदतत्त्वज्ञमुदिताशयम् । गमागमदशालौल्यमुक्तं तव वपुः स्थितम् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

सत्‌ ओर असत्‌ के निर्णय के तत्त्व को जाननेवाले हे राजन्‌ प्रसन्न चित्त से युक्त तथा आरोह ओर अवरोह की हेतु (संसार में आवागमन की हेतु) भोगासक्ति से होनेवाली लालच से शून्य आपका शरीर अवस्थित हे