Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 63, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 63, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 63 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
सुरघुरुवाच ।
न तदस्ति मुने वस्तु यत्रोपादेयतास्ति नः ।
यावत्किंचिदिदं दृश्यं तावदेतन्न किंचन ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
परिघ द्वारा कथित अर्थ का सभी युक्तियो से समर्थन ओर अनुमोदन कर रहे युरघु कहते है।
सुरघु ने कहा : हे मुने, संसार में वह वस्तु ही नहीं हे, जो कि हम लोगों के लिए उपादेय हो, जो कुछ
यह दृश्य हे, वह सब कुछ भी नहीं है यानी मिथ्या ही है