Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 64, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

विरक्तो जन्ममरणे यथा दुःखी न मानवः । परिज्ञाताखिलाविद्यं तथा चित्तं न दुःखितम् ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे विरक्तपुरुष, कामुकपुरुष के समान पत्नी आदि का मरण होने पर दुःखी नहीं होता, वैसे ही जिसने चारों ओर से विचारकर विषय, इन्द्रिय, शरीर आदि समस्त दुश्यरूप मिथ्याभ्रान्ति का परिज्ञान कर लिया है, एेसा तत्त्वज्ञ पुरुष का अन्तःकरण दुःखी नहीं होता