Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 64, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
अविद्यासंपरिज्ञातमिदमेव महौषधम् ।
अविद्याविततव्याधेस्तिमिरस्येव दीपकम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, जैसे अन्धकाररूपी रोग का महान्
ओषध दीपक है, वैसे ही जगदाकार में फैले हुए इस अज्ञानरूपी रोग का सबसे बड़ा ओषध "यह जगत्
अविद्यामात्र है" इस प्रकार का विचारजनित ज्ञान ही है