Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 64, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अविद्या संपरिज्ञाता यदैव हि तदैव हि ।
सा परिक्षीयते भूयः स्वप्नेनेव हि भोगभूः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे यह स्वप्न है, इस प्रकार जाने गये
स्वप्न से स्वाप्निक भोग भूमि का सदा सर्वदा के लिए विनाश हो जाता है, वैसे ही ज्यों ही यह अविद्या है,
इस प्रकार अविद्या का स्वरूपज्ञान हो गया, त्यों ही उसका सदासर्वदा के लिए विनाश हो जाता है