Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 64, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
व्यवहारपरोऽप्यन्तरसक्तमतिरेकधीः ।
स्पृश्यते नैनसा साधुर्मत्स्येक्षणमिवाम्भसा ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे जल मछलियों के नेत्रों को स्पर्श नहीं करता (यदि जल मछलियों के नेत्रों को स्पर्श करेगा, तो नेत्रों
के बन्ध हो जाने के कारण जल में उनके देखना आदि व्यवहार ही लुप्त हो जायेंगे), वैसे ही व्यवहार में
निरत हुए भी साधु पुरुष को, जो कि अद्वितीय परब्रह्म में बुद्धि रखता है और भीतर से आसक्ति वर्जित
है, अविद्यारूपी पाप स्पर्श नहीं करता