Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 64, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
प्राप्ते चिद्भासुरालोके प्रक्षीणाऽज्ञानयामिनी ।
शेमुषी परमानन्दमागता ज्ञस्य राजते ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, दैदीप्यमान चिद्रूपी प्रकाश का उदय हो
जाने पर अज्ञानरूपी रात्रि सदा के लिए विलीन हो जाती है ओर परमानन्द को प्राप्त हुई ज्ञानी की प्रज्ञा
प्रकाशित रहती है