Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 64, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 64, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 64 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
दिनानि जीव्यते तानि सानन्दास्ते क्रियाक्रमाः ।
आत्मचन्द्रोदिता येषु चिज्ज्योत्स्ना हृदयाम्बरे ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
अब विद्या की स्तुति करते हैं।
वे ही दिन जीवनपूर्ण हैं और वे ही क्रियाएँ आनन्द से युक्त हैं, जिन दिनों और क्रियाओं में सदा
सर्वदा हृदयरूपी आकाश में आत्मारूपी चन्द्रमा से उदित हुई चिद्रूपिणीज्योत्सना खिल रही हो या
प्रकाश रही हो