Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 66, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
यावन्नाधिगतं ज्ञेयं यावत्क्षीणा न चित्तभूः ।
यावत्तीर्णो न संसारस्तावन्मे कुशलं कुतः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
प्रिय बन्धो, जब तक ज्ञातव्य वस्तु का ज्ञान नहीं हो जाता, जब तक मन में उत्पन्न होनेवाला
काम, संकल्प आदि नष्ट नहीं हो जाते और जब तक इस संसार के पार नहीं लग जाते, तब तक मैं
कुशल कैसे हो सकता हूँ ?