Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 66, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
भास उवाच ।
साधो स्वागतताद्यैव दिष्ट्या दृष्टोऽसि मानद ।
कुशलं तु कुतोऽस्माकं संसारे तिष्ठतामिह ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
भास ने कहा : हे
माननीय साधु पुरुष, मेरा तो आज ही आगमन शुभ हुआ क्योकि उत्तम भाग्यवश मुझको तुम्हारा दर्शन
हो गया । पर भेया, इस दुःखमय ससार में चक्कर काट रहे हम लोगों की कुशलता कैसे हो सकती
है?