Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 66, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 66, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 66 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इत्युक्तवन्तं संसारसमुद्विग्नमलं तथा ।
प्राहाप्राप्तमहाज्ञानं सुहृत्सुहृदमादरात् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : भद्र, उस प्रकार प्रश्न पूछनेवाले तथा संसार से उद्विग्न हुए
अपने मित्र (भास) अत्यन्त आदरपूर्वक वक्ष्यमाण प्रकार से स्पष्ट कहने लगा