Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 28
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हिन्दी अर्थ
जिन्होंने आत्मतत्त्व के विज्ञान में दृढ़ प्रतिष्ठा पाई है, ऐसे सिद्ध, लोकपाल
तथा अन्यान्य देवता जो इस जगत् के प्रांगण में स्थित रहते हैं, वह भी वन्द्या संसक्ति की सामर्थ्य
हे