Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 29
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हिन्दी अर्थ
तीन लोकों से भिन्न अन्यान्य भुवन (महः, जनः, तपः आदि लोकों मेँ रहनेवाले तत्त्वज्ञ
महात्मा लोग) मरण से रहित शरीर के यन्त्रों के समूहों को जो धारण करते हैं, वह भी वन्द्या संसक्ति की
सामर्थ्य है