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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 42

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 42

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

मतिवाले जीव के शरीरो की गिनती करने के लिए कोन समर्थ हो सकता है ? अर्थात्‌ कोई नहीं हो सकता