Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 43
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हिन्दी अर्थ
चोटी से लेकर मूल तक मेरु पर्वत का अवलम्बन करनेवाली मोतियों की लतारूपी गंगा
के तरंगरूपी मोतियों की गणना कदाचित् कोई कर सकता है, पर आसक्त चित्तवाले जीवों के शरीरो
की गणना तो कोई नहीं कर सकता