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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 44

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 44

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

जिनका चित्त संसारमें आसक्त है, उन्हीं जीवों के लिए ये रम्य अन्तःपुर की पंक्तियाँ, जिनके नाम रौरव, अवीचि, कालसूत्र आदि हैं, किसी कारीगर ने बनाई हैं