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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 45

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 45

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

श्रीरामजी, आसक्त चित्तवाला अतएव दुःखों से सूखा हुआ पुरुष जल रही नरकरूपी अग्नियों के लिए एक तरह से इन्धन का संग्रह (समूह) है, यह आप जानिए, क्योंकि नरकरूपी अग्निर्यो उसी काष्ठ-संचय से जलती हैं