Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 46
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हिन्दी अर्थ
इस जगती-तल में जो कुछ भी दुःखजाल है, वह सब आसक्तचित्त
पुरुषों के लिए ही कल्पित है