Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 69, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 69, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 69 · श्लोक 47
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हिन्दी अर्थ
जैसे जल के तरगों से संवलित बड़ी-बड़ी नदियाँ समुद्र के प्रति
जाती हैं, वैसे ही सम्पूर्ण दुःखों की परम्पराएँ आसक्त चित्तवाले पुरुष के प्रति जाती हैं