Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 72, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 72, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 72 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
संनिवेशांशवैचित्र्यमज्ञानामेव तुष्टये ।
तज्ज्ञानां तु यथाभूतभूतपञ्चकदर्शनम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, समस्त ब्रह्माण्ड में देश, काल और वस्तु के परिच्छेद से शून्य विशुद्ध चैतन्य की ही
सत्ता है, दूसरे की नहीं, इसलिए आपको “यह, वह, मैं, यह शरीर और वह पुत्र आदि मेरे हैं” इत्यादि
विविध भ्रमों में नहीं पड़ना चाहिए